सुन्न होगे फुलवारी, सम्मानपुर (टेमरी) म घर टूटे के मार्मिक कविता
धरसीवां विधानसभा मंदिर हसौद तीर गांव सम्मानपुर (नकटी) के गरीब परिवार मनके घर ल छत्तीसगढ़ सासन द्वारा बुलडोजर ले तोड़े ज…
धरसीवां विधानसभा मंदिर हसौद तीर गांव सम्मानपुर (नकटी) के गरीब परिवार मनके घर ल छत्तीसगढ़ सासन द्वारा बुलडोजर ले तोड़े ज…
'पर्यावरण दिवस पर छत्तीसगढ़ी कविता' "मै अब्बड़ रोयेव" हांथ म टंगिया काटत हे सबो जंगल झाड़ी रूख ह घबरा…
सावन के रिमझिम फुहार कभु करे छाव त कभु धुप खेलय जईसे लुका-छुप भुईयां धरे हे नवा रूप मेचका हासय कले चुप धान के थरहा…
बेरा उए के अगोरा भोर ल छेंके करिया चोर कईसे होही सुरुज अंजोर। रात बिकट अंधियारी हे अऊ बेरा घला करारी हे तन म हमाय गरिया…
कविता : माते हे देवारी सुन संगी सुन ग संगवारी घर म चुरत हे बरा-सोंहारी रांधत हे बहिनी महतारी चारो कोती माते हे देवारी।…
तोर कोरा म श्रीराम खेले ओ मोर कौशल्या दाई जेकर कोरा म श्री राम खेले ओ मोर कौशल्या दाई हे भानुमंत के बेटी कहाये ये मोर च…
कविता : छत्तीसगढ़ के माटी मोर छत्तीसगढ़ के माटी तोला बंदव कोटि-कोटि, सुग्घर होथे इंहा खेती बड़ सुहाथे अंगाकर रोटी। पावन …
छत्तीसगढ़ म पधारे हे गणपति महराज छत्तीसगढ़ म पधारे हे गणपति महराज संग म मुसुआ के सवारी करे हवय आज। जम्मो डाहर जयकारा …
तीजा पोरा आवत हे बहिनी अपन भईया ल सोरियावत हे कपड़ा लत्ता ल झोला म ओरियावत हे, नोनी जातो देख तो तोर ममा आवत हे अईसे लाग…
भाई बहिनी के दुलार राखी तिहार होत बिहनिया नहा धो हो जथे तियार अब्बड करथे हमला मया अऊ दुलार अरूण अरूणा दिव्या दुर्गा दी…
टिपिर टिपिर बरसे पानी पाना-पाना डारा-डारा झुमय नाचे पारा-पारा नेवता हवे झारा-झारा खेले आहु हमर पारा गाना गावय चंदा रानी…
फागुन महिना आमा मऊरे, गिरत हे मऊहा खेत-खार मेड़-पार रेंगे गोरी अऊहा झऊहा कोनो बिने टुकनी म त कोनो बिने ओली म सबो डाहर म…
जगतगुरु संत रविदास माघी पुन्नी सुग्घर अंजोरी रात सन तेरह सौ अन्ठानबे के हे बात खुसी छागे कासी अऊ आसपास जब जनम लिस संत ग…